सुभाष युवा मोर्चा - धूमधाम से मनायी गयी महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जयंती

    दिनांक - 2 अक्टूबर, 2018

    जगदीश नगर, गाजियाबाद 

    स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत महापुरुषों को सम्मान देते हुए सुभाष युवा मोर्चा-संगठन ने महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिवस सुभाष युवा मोर्चा के जगदीश नगर स्थित कार्यालय सुभाषिनी ऑफसेट पर बड़ी धूम-धाम से मनाया. इस अवसर पर देश में किसानों पर हो रहे अत्याचारों की निंदा की गयी. मोर्चा के द्वारा महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर मार्ल्यापण कर जन्मदिवस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया.

    सामाजिक एकता व अखंडता के प्रतीक थे बापू : सतेन्द्र यादव 

    इस अवसर पर सुभाष युवा मोर्चा के संस्थापक व संयोजक सतेन्द्र यादव जी ने बताया कि 2 अक्टूबर का दिन देश के दो महान स्वतंत्रता सेनानी महात्मा गांधी, जिन्हें देश ‘राष्ट्रपिता व बापू’ के नाम से जानता है एवं लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के रूप में मनाया जाता है. महात्मा गांधी को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित किया था, तब से उन्हें सारा देश प्यार से राष्ट्रपिता ही कहता है. लाल बहादुर शास्त्री देश के दूसरे प्रधानमंत्री रहे हैं, जिन्होंने ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया. महात्मा गांधी अहिंसा व सामाजिक एकता में विश्वास रखते थे. भारत को आजादी दिलाना उनके जीवन एक मात्र उदे्दश्य था. 1920 में असहयोग आन्दोलन, 1930 अवज्ञा आन्दोलन व 1942 में अंग्रेज भारत छोड़ो आन्दोलन आदि द्वारा भारत को आजादी दिलाने का कारगार प्रयास किया.

    सादा जीवन, उच्च विचार की प्रतिमूर्ति हैं लाल बहादुर शास्त्री : अशोक श्रीवास्तव 

    लाल बहादुर शास्त्री नेहरू की आकस्मिक मृत्यु के बाद प्रधानमंत्री बने थे तथा 1965 की भारत पाकिस्तान की लड़ाई के समय उन्होंने देश को सम्भाले रखा. उन्होंने अपने कार्यकाल में देश को कई बार संकटों से निकाला एवं आज भी वे अपनी साफ-सुथरी छवि के कारण जाने जाते है. ‘राष्ट्रीय सुभाषवादी भारतीय समाजवादी पार्टी' (सुभास) पार्टी के अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि महात्मा गांधी जन्म से सत्य और आहिंसावादी नहीं थे, बल्कि अपने आपको उन्होंने आहिंसावादी बनाया. आज संसार में जो हिंसा की आग लगी हुई है. ऐसे में महात्मा गांधी के विचारों द्वारा ही इसे शांत किया जा सकता है. वे एक ऐसे महापुरूष थे जिन्होंने भारतीयों के आजादी के सपनों को साकार किया. लाल बहादुर शास्त्री स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान कई वर्ष जेल में रहे. उनकी सादगी, ईमानदारी और देशभक्ति के लिए उन्हें मरणोपरान्त राष्ट्र के सर्वोच्च पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया है.

    देश की आज़ादी में अतुल्य योगदान देकर हृदयों में अमर हैं गांधी जी एवं शास्त्री जी : पं. अशोक भारतीय 

    पं. अशोक भारतीय (संयुक्त व्यापार मण्डल के चेयरमैन) ने कहा कि गांधी जी का देश की आजादी में सबसे बड़ा योगदान रहा है, उनके अतुल्य कार्यों के लिए लोगों को उनके जीवन की मिसाल दी जाती है. वह एक महान समाज सुधारक थे, जो छुआ-छात व ऊँच-नीच के भेदभाव को खत्म करना चाहते थे. गांधी जी विदेशी वस्तुओं के खिलाफ थे तथा स्वदेशी अपनाने पर जोर देते थे. लाल बहादुर शास्त्री 1965 के पाकिस्तान युद्व के समाप्त हो जाने के बाद ताशकन्द समझौता पर हस्ताक्षर करने ताशकंद गये तथा हस्ताक्षर के एक दिन बाद 11 जनवरी 1966 को हार्ट अटैक के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी. सादा रहन-सहन व नीतियों के द्वारा वे आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है. यादव वैवाहिक परिचय सम्मेलन के अध्यक्ष राम अवतार यादव, यादव वैवाहिक परिचय सम्मेलन के संयोजक के. पी. यादव, एस. एन. शर्मा, अक्षय श्रीवास्तव आदि ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे.

    कार्यक्रम में गोपाल सिंह, सुनील दत्त, विजय वालिया, हरीश शम्मी, आलोक त्यागी, राजीव त्यागी, संध्या त्यागी, जसविन्द्र सिंह सन्नी, वागीश शर्मा, सौरभ यादव, ओमप्रकाश भोला, दीपक शर्मा, राजीव त्यागी, वाई. के. गोयल, जगदीश गोयल, गौरव सूर्यवंशी, दीपक वर्मा, राजीव रैना, किशन गर्ग, गणेश दीक्षित, राजीव रैना, राम गोपाल, अनुपम अग्रवाल, दीपक कुमार, रिंकू, नसरू, संदीप कुमार, विवेक राणा, अक्षय, सुनील यादव आदि सैंकडों मान्यगणों ने उपस्थित होकर कार्यक्रम का गौरव बढ़ाया. 

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