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सुभाष युवा मोर्चा - अन्तर्द्वन्द में हमारे नेतागण : सतेन्द्र यादव

भारत के शरीर से जहर को काटकर अलग कर दिया गया है-सरदार पटेल

7 अगस्त 1947 को मौहम्मद अली जिन्ना ने भारत छोड़ा, उसके बाद वो कभी भारत नहीं आये। इससे पहले गांधी को छोड़कर तमाम नेतागण 3 जून 1947 को भारत का विभाजन स्वीकार कर चुके थे। बाद में 14 जून को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में जब गोविंद बल्लभपंत ने प्रस्ताव रखा ‘‘आज हमे विभाजन या मृत्यु में से एक का चुनाव करना है।’’ तब गांधी जी ने भी विभाजन को स्वीकार कर लिया, जाते समय जिन्ना से बाकी देश  में बच गये मुस्लिम लीग के नेताओं ने पूछा हम क्या करें? जिन्ना ने उन्हें भारत में रहकर भारत के प्रति वफादार बनने के लिए कहा।

अगले दिन 8 अगस्त को सरदार पटेल ने असेम्बली में कहा ,भारत के शरीर से जहर को काटकर अलग कर दिया गया है और तुरन्त ही पटेल बोले, क्योंकि हवाओं को पानी को बांटा नहीं जा सकता है.. हम देखेंगे वो लोग पाकिस्तान में कब तक रहेंगे और क्या करेंगे?

इसी तरह अन्य कई नेतागण भी अन्तर्द्वन्द में थे, डा. अम्बेडकर ने पहले पाकिस्तान की मांग का समर्थन करते हुए सारे मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने की बात कही, लेकिन बाद में संविधान सभा में ये भी कहा,

‘‘ज्यों-ज्यों समय बीतेगा सब महसूस करेंगे सबके लिए संगठित भारत ही अच्छा था।’’

मुस्लिम नेता पूरी तरह भ्रम में थे, जो न तो सबके सब पाकिस्तान जाना चाहते थे और जानते थे कि न ही यह संभव है। विभाजन के बाद लगभग पाकिस्तान के बराबर ही मुसलमान भारत में रह गये।

इस सारे संघर्ष  में सबसे ज्यादा अन्तर्द्वन्द में हमारे हिन्दूवादी नेता थे जो भारत को किसी भी कीमत पर अखण्ड देखना चाहते थे, लेकिन मुसलमानों के साथ रहने को तैयार नहीं थे। पहले जिन्ना, पटेल, अम्बेडकर तीनों ने आबादी के बँटवारे की बात कही और बाद में तीनों ने इसे नकार दिया।

30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की मृत्यु पर जिन्ना ने दुःख व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘Greatest Hindu is died’’ अर्थात महानतम हिन्दू की मृत्यु हो गई। तीन दिन बाद जिन्ना के एक साथी डाक्टर ने जब उन्हें दुःखी पाया तो उसने पूछा क्या हो गया तब जिन्ना ने कहा मैं आपने आपसे नाराज हूँ। मुझे गांधी की मृत्यु पर "Greatest Indian is died" अर्थात महानतम भारतीय की मृत्यु हो गयी, कहना चाहिए था।

इन सबसे समझदार तो अंग्रेज थे, जो 1857 की क्रांाति को दबाने से लेकर 1947 तक बहुत ही रणनीतिक रूप से बड़ी स्थिर बुद्धि से भारतीयों को आपस में विभाजित करते रहे और इतना विभाजित कर गए कि आज 71 वर्ष बाद भी विभाजन-विभाजन और विभाजन ही नजर आता है।

बनकर फकीर पिटी लकीर।भारत के वीर धोखे में आ गये।।

सतेन्द्र यादव

संयोजक-सुभाष युवा मोर्चा

सम्पदक-हिन्द क्रान्ति समचार पत्र

मो. 9350728743

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